गुरुवार को ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सईद ख़तीबज़ादे ने कहा कि कनाडा ने इस प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया था और जो लोग इस इसके पीछे हैं, उनका मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन का इतिहास है, विशेष रूप से सैन्य हस्तक्षेप करना और तानाशाही सरकारों को हथियार बेचना।
एक दिन पहले ही संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति पर एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसके पक्ष में 82 वोट पड़े और विरोध में 30, जबकि 64 सदस्य अनुपस्थित रहे।
प्रस्ताव में, ईरान में अधिक मौत की सज़ाओं पर "गंभीर चिंता" व्यक्त की गई और जेलों की ख़राब स्थितियों को दूर करने का आग्रह किया गया है। इसी प्रकार अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने वाली जेलों में बंद महिला मानवाधिकारों की रिहाई की मांग की गई है। अल्पसंख्यकों से संबंधित अधिकारों के उल्लंघन को बंद करने की मांग के साथ ही 2021 में निष्पक्ष राष्ट्रपति चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
ख़तीबज़ादे का कहना है कि जो देश इस प्रस्ताव के पीछे हैं, उन्होंने अमरीकी ग़ुंडागर्दी के प्रभाव में ईरानी राष्ट्र के ख़िलाफ़ अमरीकी आर्थिक आतंकवाद के प्रति आंखें मूंद रखी हैं। यह वहीं देश हैं जो वाशिंगटन के ग़ैर क़ानूनी और अमानवीय प्रतिबंधों की निंदा के बजाए, उसके पिट्ठू बन गए हैं।